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आकार नहीं ले पा रही गैंडा पुनर्वास की दूसरी योजना

Posted On: 1 Jun, 2012 Others,न्यूज़ बर्थ में

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लखीमपुर, सूबे के इकलौते वन्यजीव अभयारण्य में सफलता की नई कहानी गढ़ने वाली विश्व की अनोखी गैंडा पुनर्वास योजना भी उपेक्षा की शिकार है। गैंडा परिवार की मौजूदा सदस्य संख्या और उनमें पर्यटकों की गहरी रुचि को देखते हुए वर्षो पहले शासन स्तर से मंजूर द्वितीय पुनर्वास योजना आकार नहीं ले पा रही है।
दरअसल दुधवा टाइगर रिजर्व में इस योजना के लिए आरक्षित क्षेत्र गैंडा परिवार के मौजूदा सदस्यों के लिए छोटा पड़ने लगा है। इस कारण भी यहां एक और आरक्षित क्षेत्र की जरूरत महसूस की जा रही है। दुधवा नेशनल पार्क के दुधवा टाइगर रिजर्व में तब्दील होने के बाद वर्ष 1984 में यहां पहली गैंडा पुनर्वास योजना शुरू की गई थी। शुरुआत में कांगीरंगा (असोम) से पांच गैंडे यहां लाए गए थे, जिनमें से तीन मादा थे। इसमें से दो गर्भवती मादा गैंडों की कुछ ही दिन बाद मौत हो गई थी। एक साल बाद नेपाल से पांच मादा गैंडे लाए गए। इसके बाद से यहां गैंडा परिवार लगातार बढ़ रहा है। एक सींग वाले भारतीय गैंडों को उनके पूर्वजों के घर दुधवा में बसाने का भारत सरकार का निर्णय वंशवृद्धि की रफ्तार को देखकर सही साबित हो रहा है। भारत सरकार के विशेषज्ञ दल ने मिट्टी, वनस्पतियों, दलदली क्षेत्रों और कीट-पतंगों की मौजूदगी के अध्ययन के बाद भारतीय गैंडों के पुनर्वासन के लिए दुधवा को सर्वाधिक उपयुक्त बताया था।
दुधवा में गैंडा पुनर्वास के लिए आरक्षित 27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को बैटरी चालित विद्युत बाड़ से घेरकर सुरक्षित किया गया है। मौजूदा समय में यहां गैंडों की संख्या 29 मानी जाती है लेकिन शीघ्र प्राप्त होने वाले गणना के एक नए आंकड़ों में इनकी संख्या अधिक होने का अनुमान भी लगाया जा रहा है। पिछली गणना के समय इनकी संख्या 31 पाई गई थी, बाद में दो गैंडों की मौत के साक्ष्य मिलने के बाद इनकी संख्या 29 मानी गई। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह कहते हैं कि द्वितीय गैंडा पुनर्वास योजना में विलंब दुधवा के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। बाघ व गैंडा दुधवा के मुख्य आकर्षण हैं। मौजूदा समय में ज्यादातर गैंडे एक ही नर गैंडा की संतानें हैं। इसी नर गैंडा से तीसरी पीढ़ी तक प्रजनन हुआ है। इस तरह इनब्रीडिंग (अंत:प्रजनन) की समस्या से निपटने के लिए भी आवश्यक है कि किसी दूसरे स्थान से नर-मादा गैंडे लाकर वंश वृद्धि कराई जाए। डॉ. सिंह सुझाव देते हैं कि यदि नया क्षेत्र आरक्षित करने में समस्या आ रही है तो मौजूदा क्षेत्र का ही दायरा बढ़ा दिया जाना चाहिए।
बजट का इंतजार : भट्ट
दुंधंवा टाइगर रिजर्व के उप निदेशक गणेश भट्ट ने कहा कि दुधवा में द्वितीय गैंडा पुनर्वास योजना शासन स्तर से स्वीकृत है। इसके लिए बेस कैम्प की स्थापना का कार्य भी पूरा हो गया है। फेंसिंग कार्य के लिए बजट का इंतजार है। आधारभूत ढांचा तैयार हो जाने के बाद द्वितीय योजना के लिए बाहर से गैंडे लाए जाएंगे।

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

चन्दन राय के द्वारा
June 1, 2012

श्रीमान , आज के इस दौर में जब हर कोई अपनी डफली लिए नेता जी का बजा बजा रहा है तो आपने कम से कम बेजुबान पशुओं को अपनी आवाज और स्नेह दोनी दिया , बहुत ही जरूरतमंद आलेख , कम से कम लोगो को ज्ञान तो होगा ,जागरूक हो ना हो


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